भजन संहिता ६५:६
तू जो पराक्रम का फेंटा कसे हुए, अपनी सामर्थ्य के पर्वतों को स्थिर करता है;भजन संहिता ६५:६ · IRV
यह पद अन्य भाषाओं में
- English — Psalms 65:6
- By your power, you form the mountains, having armed yourself with strength.
- ગુજરાતી — ગીતશાસ્ત્ર ૬૫:૬
- તેમણે પોતાને બળે પર્વતો સ્થાપ્યા, તેઓ સામર્થ્યથી ભરપૂર છે.
संदर्भ में
४क्या ही धन्य है वह, जिसको तू चुनकर अपने समीप आने देता है, कि वह तेरे आँगनों में वास करे! हम तेरे भवन के, अर्थात् तेरे पवित्र मन्दिर के उत्तम-उत्तम पदार्थों से तृप्त होंगे।
५हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, हे पृथ्वी के सब दूर-दूर देशों के और दूर के समुद्र पर के रहनेवालों के आधार, तू धार्मिकता से किए हुए अद्भुत कार्यों द्वारा हमें उत्तर देगा;
६तू जो पराक्रम का फेंटा कसे हुए, अपनी सामर्थ्य के पर्वतों को स्थिर करता है;
७तू जो समुद्र का महाशब्द, उसकी तरंगों का महाशब्द , और देश-देश के लोगों का कोलाहल शान्त करता है ; (मत्ती 8:26, यशा. 17:12,13)
८इसलिए दूर-दूर देशों के रहनेवाले तेरे चिन्ह देखकर डर गए हैं; तू उदयाचल और अस्ताचल दोनों से जयजयकार कराता है।
